चारों युगों में संतों को मिले कबीर परमात्मा
हमारे हिन्दू धर्म के पवित्र शास्त्र वेदों में प्रमाण हैं कि परमात्मा प्रत्येक युग में अपने निजधाम सतलोक से चलकर हल्का तेज पुंज का शरीर धारण करके पृथ्वी लोक पर आते हैं गति करके आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को दृढ़ भक्तों को मिलते हैं और अपनी यथार्थ जानकारी अपना ज्ञान अपने द्वारा रची गई सृष्टि की जानकारी बताकर अपने गवाह बनाकर जाते हैं
जिसका प्रमाण ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 96 मंत्र 18
कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैैं
सतयुग में सत सुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिंन्द्र नाम से, द्वापर में करुणामय नाम से तथा कलियुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं
कबीर परमेश्वर प्रत्येक युग में लीला करते हैं
ज्ञानी गरुड़ हैं दास तुम्हारा तुम बिन नहीं जीव निस्तारा इतना कह गरुड़ चरण लिपटाया शरण लेवों अविगत राया सतयुग में विष्णु जी के वाहन पक्षी राज गरुड़ जी को कबीर साहेब जी ने उपदेश दिया उनको सृष्टि रचना सुनाई और गरुड़ जी मुक्ति के अधिकारी हुए
त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर मुनिंद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया उनकी कृपा से ही समुंद्र पर पत्थर तैरे धर्मदास जी के वाणी में इसका प्रमाण है
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार | जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर सिला तिराने वाले|| धन्य- धन्य सत्य कबीर भक्त की पीड़ मिटाने वाले
द्वापर युग में परमेश्वर कबीर जी करुणामय नाम से आए थे और पंथ प्रचार के लिए चतुर्भुज नाम की एक प्यारी आत्मा को चुना लाखों जीवों तक ज्ञान पहुंचाया और इस प्यारी आत्मा को पार किया
परमेश्वर कबीर साहेब जी संत गरीबदास जी को 1727 में सतलोक से आकर मिले।
अपना तत्वज्ञान कराया, नाम दिया तथा सतलोक दर्शन करवाया।
संत गरीबदास जी ने वाणी में कहा है- हम सुल्तानी नानक तारे, दादू को उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद न पाया, काशी माहे कबीर हुआ।।
कबीर परमेश्वर जी अब्राहिम अधम सुल्तान जी बलख बुखारा के राजा को मिले और सार शब्द का उपदेश कराया।
कबीर सागर के अध्याय " सुल्तान बोध" में पृष्ठ 62 पर प्रमाण है:-
प्रथम पान प्रवाना लेई। पीछे सार शब्द तोई देई।।
तब सतगुरु ने अलख लखाया। करी परतीत परम पद पाया।।
सहज चौका कर दीन्हा पाना(नाम)। काल का बंधन तोड़ बगाना।।
आदरणीय दादू साहेब भी कबीर परमेश्वर के साक्षी हुए
पूर्ण परमात्मा जिंदा महात्मा के रूप में दादू साहेब को 7 वर्ष की आयु में मिले तथा सत्यलोक ले गए।
दादू साहेब जी की अमृतवाणी में कबीर साहेब का वर्णन-
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।।
'कबीर सागर' के भोपाल बोध में विवरण मिलता है जालंधर नगर के राजा भोपाल को परमेश्वर कबीर साहेब ने शरण में लेकर सत भक्ति प्रदान की सतलोक दिखाया साथ ही राजा भोपाल की 9 रानीयों 50 पुत्रों और एक पुत्री को शरण में लेने का विवरण है
पूर्ण परमात्मा कभी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते वह शसरीर शिशु रुप में आते है और शसरीर ही जाते हैं जिसका प्रमाण
यजुर्वेद अध्याय 40 मंत्र 8
ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 93 मंत्र 2
ऋग्वेद मण्डल नं 10 सूक्त 4 मंत्र 3
सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।
पूर्ण परमात्मा कविर्देव है, यह प्रमाण यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25 तथा सामवेद संख्या 1400 में भी है
उपरोक्त वाणी से सिद्ध है कि कबीर परमेश्वर ही अविनाशी परमात्मा है। यही अजरो-अमर है। यही परमात्मा चारों युगों में स्वयं अतिथि रूप में कुछ समय के लिए इस संसार में आकर अपना सतभक्ति मार्ग देते हैं।
सर्व मानव समाज से विनय है कि वर्तमान में पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी संत रामपाल जी महाराज के रूप में तत्वदर्शी संत की भूमिका निभा रहे हैं जो टीवी प्रोजेक्टर्स के माध्यम से सर्व शास्त्रों से प्रमाणित ज्ञान बता रहे हैं अतः सर्व समाज के भाई बहन उनका ज्ञान सुनें सत्संग सुनकर समझकर नाम उपदेश लेकर सत भक्ति करके अपना कल्याण कराएं
#किसको_मिले_परमात्मा
#SantRampalJiMaharaj
Comments
Post a Comment